Author Archives: Avinash Chanchal

तुम्हारे राहों तक जाती है सारे कदम मेरे

सुनो दगड़िया, परेशान हो गया हूं। रात दिन तुम्हें ही याद करता हूं। तुम्हारे प्रेम को शायद उतना नहीं लेकिन दोस्ती को। हमारी दोस्ती बहुत याद आती है साथी। आजकल पुराने दिनों को याद करता हूं। शुरूआती दिन जब हम … Continue reading

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21वीं सदी के गाँव

21वीं सदी का गाँव मजेदार है। बहुत से परिवार में लड़कियां पहली बार मैट्रिक बोर्ड दे रही हैं। पढ़ने के लिए वे अपने घर में लड़ रही हैं। साइकिल से बाजार-शहर सब जा रही हैं। वे सिर्फ़ प्रेम ही नहीं … Continue reading

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थोड़ा बाहर झांको….

फेसबुक से बाहर झांकने की जरुरत है। अपने आसपास की रोजमर्रा की जिन्दगी से भी बाहर ताक-झांक करना जरुरी है। अपने तरह के, अपने ही सर्कल के, काम-धंधे के लोगों से इतर लोगों से मिलना जरुरी है। शहर में हो, … Continue reading

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हिन्दी पत्राकारिता की सालगिरह विशेष

साल 2011 की बात है। तब मैं भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में हिन्दी पत्रकारिता का स्टूडेंट था। आईआईएमसी पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थान है। उस समय हमारे सिलेबस में वेब पत्रकारिता नाम का एक चैप्टर था, जिसके लिये दस नंबर तय किये … Continue reading

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बुखार के दिन

बुखार जैसे दिन बीत रहे हैं. छूकर देखा तो सच में बुखार ही था. मन भी थका और शरीर भी अब थकने लगा है. गहरी अकेली शाम, कमरे में शाम की गहरी रौशनी आ रही है. खिड़की पे पर्दे डाल … Continue reading

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भीड़ में ज्यादा अकेलापन

भीड़ में ज्यादा अकेलापन लगता है। जाने पहचाने चेहरे उस अकेलेपन को और गहरा करते चलते हैं। डर, हाँ वही लगने लगता है। कितना झूठ और अँधेरा है आसपास। लोग कहते हैं ख़ुशी रहो, खुश दिखो, लेकिन सुख वो कहाँ … Continue reading

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दुःख के सफर में अकेले ही चलना है..

आप एक सफर में होते हैं- दुःख के सफर में। सफर में और भी लोग चल रहे होते हैं- उसी दुःख के सफर में। सड़कों पर चलते हुए, छोटी नदी में तैरते हुए कोई और भी आपके साथ चला आता … Continue reading

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